Ujjain

उज्जैन का इतिहास: उज्जैन नगरी भारत के मध्य प्रदेश राज्य का एक बहुत ही प्रमुख शहर है जो क्षिप्रा नदी के किनारे बसा है। यह एक अत्यन्त प्राचीन शहर में से एक है। उज्जैन विक्रमादित्य के राज्य की राजधानी थी। उज्जैन को कालिदास की नगरी के नाम से भी जाना जाता है। उज्जैन में हर 12 वर्ष पर सिंहस्थ कुंभ मेला लगता है। जिसमे लाखो की संख्या में रोज़ लोगो इस मेले के एते हैं ,भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में एक महाकाल इस नगरी में स्थित है। उज्जैन मध्य प्रदेश के सबसे बड़े शहर इन्दौर से 55 कि॰मी॰ की दुरी पर है। उज्जैन के प्राचीन नाम अवन्तिका, उज्जयनी, कनकश्रन्गा आदि है। उज्जैन मंदिरों की नगरी है। यहाँ पर कई तीर्थ स्थल है। यह मध्य प्रदेश का पाँचवा सबसे बड़ा शहर माना है।

महाकालेश्वर मंदिर

महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन के पवित्र शहर में हिंदुओं के सबसे शुभ मंदिरों में से एक माना जाता है। यह मंदिर एक झील के पास स्थित है। इस मंदिर में विशाल दीवारों से घिरा हुआ एक बड़ा आंगन है। इस मंदिर के अंदर पाँच स्तर हैं और इनमें से एक स्तर भूमिगत है।महाकालेश्वर में बनी मूर्ति को अक्सर दक्षिणामूर्ति भी कहा जाता है, क्योकि यह दक्षिण मुखी मूर्ति है। शिवेंत्र परंपरा के अनुसार ही 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक इसे चुना गया था। ओमकारेश्वर महादेव की प्रतिमा को महादेव तीर्थस्थल के उपर पवित्र स्थान पर बनाया गया है। इसके साथ ही गणेश, पार्वती और कार्तिकेय की प्रतिमा को भी पश्चिम, उत्तर और पूर्व में स्थापित किया गया है। दक्षिण की तरफ भगवान शिव के वाहन नंदी की प्रतिमा भी स्थापित की गयी है। कहा जाता है की यह बने नागचंद्रेश्वर के मंदिर को साल में सिर्फ नागपंचमी के दिन ही एक दिन के लिये खोला जाता है। इस मंदिर की कुल पाँच मंजिले है, जिनमे से एक जमीन के निचे भी है। यह मंदिर एक पवित्र गार्डन में बना हुआ है, जो सरोवर के पास विशाल दीवारों से घिरा हुआ है। इसके साथ ही निचले पवित्र स्थान पर पीतल के लैंप भी लगाये गए है। दुसरे मंदिरों की तरह यहाँ भी भक्तो को भगवान का प्रसाद दिया जाता है। महाकालेश्वर का मंदिर का शिखर इस तरह से बनाया गया है की हमें यह आकाश की छूता हुआ दिखाई देता है, अपने आप में ही यह एक चमत्कार है। उज्जैन का महाकाल मंदिर शहर जे जनजीवन पर भी अपना वर्चस्व रखता है और वर्तमान समय में भी पारंपरिक हिन्दू परंपराओ को दर्शाता है।

श्री बडे गणेश मंदिर

श्री महाकालेश्वर मंदिर के निकट हरिसिद्धि मार्ग पर बडे गणेश की भव्य और कलापूर्ण मूर्ति प्रतिष्ठित है। मंदिर परिसर में सप्तधातु की पंचमुखी हनुमान प्रतिमा के साथ-साथ नवग्रह मंदिर तथा कृष्ण यशोदा आदि की प्रतिमाएं भी विराजित हैं। यहाँ गणपति की प्रतिमा बहुत विशाल होने के कारण ही इसे बड़ा गणेश के नाम से जानते हैं। गणेश जी की मूर्ति संरचना में पवित्र सात नदियों के जल एवं सप्त पूरियों के मिट्टी को प्रयोग में लाया गया था। यहाँ गणेश जी को महिलायें अपने भाई के रूप में मानती हैं,एवं रक्षा बंधन के पावन पर्व पर राखी पहनाती हैं।

मंगलनाथ मंदिर

पुराणों के अनुसार उज्जैन नगरी को मंगल की जननी कहा जाता है। ऐसे व्यक्ति जिनकी कुंडली में मंगल भारी रहता है, वे अपने अनिष्ट ग्रहों की शांति के लिए यहाँ पूजा-पाठ करवाने आते हैं। यूँ तो देश में मंगल भगवान के कई मंदिर हैं, लेकिन उज्जैन इनका जन्मस्थान होने के कारण यहाँ की पूजा को खास महत्व दिया जाता है। कहा जाता है कि यह मंदिर सदियों पुराना है। सिंधिया राजघराने में इसका पुनर्निर्माण करवाया गया था। उज्जैन शहर को भगवान महाकाल की नगरी कहा जाता है, इसलिए यहाँ मंगलनाथ भगवान की शिवरूपी प्रतिमा का पूजन किया जाता है। हर मंगलवार के दिन इस मंदिर में श्रद्धालुओं का ताँता लगा रहता है।

हरसिद्धि

हरसिद्धि मंदिर उज्जैन के मंदिरों के शहर में एक महत्वपूर्ण मंदिर है। यह मंदिर देवी अन्नपूर्णा को समर्पित है जो गहरे सिंदूरी रंग में रंगी है। देवी अन्नपूर्णा की मूर्ति देवी महालक्ष्मी और देवी सरस्वती की मूर्तियों के बीच विराजमान है। श्रीयंत्र शक्ति की शक्ति का प्रतीक है और श्रीयंत्र भी इस मंदिर में प्रतिष्ठित है। मंदिर परिसर में एक प्राचीन कुँआ है तथा मंदिर के शीर्ष पर एक सुंदर कलात्मक स्तंभ है। इस देवी को स्थानीय लोगों द्वारा बहुत शक्तिशाली माना जाता है।

क्षिप्रा घाट

उज्जैन नगर के धार्मिक स्वरूप में क्षिप्रा नदी के घाटों का प्रमुख स्थान है। नदी के दाहिने किनारे, जहाँ नगर स्थित है, पर बने ये घाट स्थानार्थियों के लिये सीढीबध्द हैं। घाटों पर विभिन्न देवी-देवताओं के नये-पुराने मंदिर भी है। क्षिप्रा के इन घाटों का गौरव सिंहस्थ के दौरान देखते ही बनता है, जब लाखों-करोड़ों श्रद्धालु यहां स्नान करते हैं।

गोपाल मंदिर

गोपाल मंदिर उज्जैन नगर का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर है। यह मंदिर नगर के मध्य व्यस्ततम क्षेत्र में स्थित है। मंदिर का निर्माण महाराजा दौलतराव सिंधिया की महारानी बायजा बाई ने वर्ष 1833 के आसपास कराया था। मंदिर में कृष्ण (गोपाल) प्रतिमा है। मंदिर के चांदी के द्वार यहां का एक अन्य आकर्षण हैं।

गढकालिका देवी

उज्जैन का गढ़कालिका क्षेत्र तांत्रिक और सिद्ध स्थान है । मंदिर के अंदर ही गणेशजी की प्राचीन पौराणिक प्रतिमा है, सामने ही पुरातन हनुमान मंदिर है। इससे लगी हुई विष्णु की एक भव्य चतुर्भुज प्रतिमा है जो अद्भुत और दर्शनीय है।क्षिप्रातट पर प्राचीन सिद्ध शमशान है। नाथ परंपरा की भर्तृहरि गुफा और मत्स्येन्द्र नाथ की समाधि भी इसी क्षेत्र में है। मंदिर परिसर में अतिप्राचीन दीप स्तंभ भी हैं जो कि नवरात्रि के दौरान रोशन होते हैं। इनमें 108 दीप विद्यमान हैं। जो कि शक्ति का प्रतीक हैं। नौंवी सदी में इस मंदिर का जीर्णोद्धार हर्ष विक्रमादित्य ने करवाया था।

भर्तृहरि गुफा

कालिकाजी के निकट उत्तर में खेत से एक फर्लांग की दूरी पर श्री भर्तृहरि की गुफा है। बड़ा शांत और रम्य स्थल है। यहां भर्तृहरि की समाधि है।

काल भैरव

उज्जैन के मंदिरों के शहर में स्थित काल भैरव मंदिर प्राचीन हिंदू संस्कृति का बेहतरीन उदाहरण है। ऐसा कहा जाता है कि यह मंदिर तंत्र के पंथ से जुड़ा है। काल भैरव भगवान शिव की भयंकर अभिव्यक्तियों में से एक माना जाता है।

सिंहस्थ कुम्भ

सिंहस्थ उज्जैन का महान स्नान पर्व है। बारह वर्षों के अंतराल से यह पर्व तब मनाया जाता है जब बृहस्पति सिंह राशि पर स्थित रहता है।

सरकार और क्षेत्राधिकार

शहर के आसपास के अधिकांश क्षेत्रों का प्रबंधन उज्जैन नगर निगम (यूएमसी) द्वारा किया जाता है। शहर का एक डिवीजनल आयुक्त और एक कलेक्ट्रेट कार्यालय और महापौर द्वारा प्रशासित किया जाता है। वे शहर और देश नियोजन विभाग, वन विभाग, सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, लोक निर्माण विभाग और एमपी बिजली बोर्ड के लिए जिम्मेदार हैं। उज्जैन लोकसभा क्षेत्र मध्य भारत के मध्य लोक राज्य में 29 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है।

खेल

क्रिकेट शहर में सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक है। उज्जैन उज्जैन डिवीजनल क्रिकेट एसोसिएशन का भी घर है जो बीसीसीआई से संबद्ध है। शहर में कोई स्टेडियम नहीं है, लेकिन 1 9 77 और 1 9 80 में पाइप फैक्टरी मैदान में रणजी ट्रॉफी मैचों की मेजबानी की।

मेरे  प्रिये दोस्तों यदि आप इंदौर से उज्जैन के लिए जायेगे तो आप को  नानाखेड़ा बस स्टैंड जरूर मिलेगा, यहाँ पर सभी  बसे रूकती हैं,

इंदौर से उज्जैन का किराया लगभग 85  रूपए हैं , आप जब भी  नानाखेड़ा बस स्टैंड पर रुकते हैं तो आपको यहाँ पर बहुत ही सुन्दर प्रतिमा देखने को मिलेगी , ये प्रतिमा समुद्र  मंथन को दिखती हैं की कैसे समुद्र  मंथन  हुआ  था

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